महाभारत 8.5.100
कर्णे तु निहते वीरे रथव्याघ्रे नरर्षभेकिं वो मुखमनीकानामासीत्संजय भागशः
karṇe tu nihate vīre rathavyāghre nararṣabhekiṃ vo mukhamanīkānāmāsītsaṃjaya bhāgaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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