महाभारत 8.5.72
एतानि दिवसान्यस्य युद्धे भीतो धनंजयःनागमद्द्वैरथं वीरः स कथं निहतो रणे
etāni divasānyasya yuddhe bhīto dhanaṃjayaḥnāgamaddvairathaṃ vīraḥ sa kathaṃ nihato raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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