महाभारत 8.5.94
कृतवर्मा महेष्वासः सात्वतानां महारथःकर्णं विनिहतं दृष्ट्वा हार्दिक्यः किमभाषत
kṛtavarmā maheṣvāsaḥ sātvatānāṃ mahārathaḥkarṇaṃ vinihataṃ dṛṣṭvā hārdikyaḥ kimabhāṣata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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