महाभारत 8.50.10
उवाच भरतश्रेष्ठ प्रसीदेति पुनः पुनःक्षमस्व राजन्यत्प्रोक्तं धर्मकामेन भीरुणा
uvāca bharataśreṣṭha prasīdeti punaḥ punaḥkṣamasva rājanyatproktaṃ dharmakāmena bhīruṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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