महाभारत 8.50.29
समुत्थाप्य ततो राजा परिष्वज्य च पीडितम्मूर्ध्न्युपाघ्राय चैवैनमिदं पुनरुवाच ह
samutthāpya tato rājā pariṣvajya ca pīḍitammūrdhnyupāghrāya caivainamidaṃ punaruvāca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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