महाभारत 8.50.55
धनुर्ग्रहा हि ये केचित्क्षत्रिया युद्धदुर्मदाःआ देवात्त्वत्समं तेषां न पश्यामि शृणोमि वा
dhanurgrahā hi ye kecitkṣatriyā yuddhadurmadāḥā devāttvatsamaṃ teṣāṃ na paśyāmi śṛṇomi vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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