महाभारत 8.51.110
एतत्कृत्वा महत्कर्म हत्वा कर्णं महारथम्कृतार्थः सफलः पार्थ सुखी भव नरोत्तम
etatkṛtvā mahatkarma hatvā karṇaṃ mahārathamkṛtārthaḥ saphalaḥ pārtha sukhī bhava narottama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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