महाभारत 8.51.12
को हि शक्तो रणे पार्थ पाञ्चालानां महारथौभीष्मद्रोणौ युधा जेतुं शक्रतुल्यपराक्रमौ
ko hi śakto raṇe pārtha pāñcālānāṃ mahārathaubhīṣmadroṇau yudhā jetuṃ śakratulyaparākramau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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