महाभारत 8.51.28
तस्य चापच्युतैर्बाणैः परदेहविदारणैःपूर्णमाकाशमभवद्रुक्मपुङ्खैरजिह्मगैः
tasya cāpacyutairbāṇaiḥ paradehavidāraṇaiḥpūrṇamākāśamabhavadrukmapuṅkhairajihmagaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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