महाभारत 8.51.53
एतां पुरा विष्णुरिव हत्वा दैतेयदानवान्प्रयच्छ मेदिनीं राज्ञे शक्रायेव यथा हरिः
etāṃ purā viṣṇuriva hatvā daiteyadānavānprayaccha medinīṃ rājñe śakrāyeva yathā hariḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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