महाभारत 8.51.5
एते च सर्वे पाञ्चालाः सृञ्जयाश्च सहान्वयाःत्वां समासाद्य दुर्धर्षं पाण्डवाश्च व्यवस्थिताः
ete ca sarve pāñcālāḥ sṛñjayāśca sahānvayāḥtvāṃ samāsādya durdharṣaṃ pāṇḍavāśca vyavasthitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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