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महाभारत 8.51.8
त्वं हि शक्तो रणे जेतुं ससुरासुरमानुषान्त्रीँल्लोकान्सममुद्युक्तान्किं पुनः कौरवं बलम्
tvaṃ hi śakto raṇe jetuṃ sasurāsuramānuṣāntrīm̐llokānsamamudyuktānkiṃ punaḥ kauravaṃ balam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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