महाभारत 8.52.11
अद्य दुर्योधनो राजा जीविताच्च निराशकःभविष्यति हते कर्णे कृष्ण सत्यं ब्रवीमि ते
adya duryodhano rājā jīvitācca nirāśakaḥbhaviṣyati hate karṇe kṛṣṇa satyaṃ bravīmi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें