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महाभारत 8.52.1
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
स केशवस्य बीभत्सुः श्रुत्वा भारत भाषितम्विशोकः संप्रहृष्टश्च क्षणेन समपद्यत
sa keśavasya bībhatsuḥ śrutvā bhārata bhāṣitamviśokaḥ saṃprahṛṣṭaśca kṣaṇena samapadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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