महाभारत 8.52.2
ततो ज्यामनुमृज्याशु व्याक्षिपद्गाण्डिवं धनुःदध्रे कर्णविनाशाय केशवं चाभ्यभाषत
tato jyāmanumṛjyāśu vyākṣipadgāṇḍivaṃ dhanuḥdadhre karṇavināśāya keśavaṃ cābhyabhāṣata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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