महाभारत 8.55.16ततोऽर्जुनः सहस्राणि रथवारणवाजिनाम्प्रेषयामास विशिखैर्यमस्य सदनं प्रतिtato'rjunaḥ sahasrāṇi rathavāraṇavājināmpreṣayāmāsa viśikhairyamasya sadanaṃ pratiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें