Loading
महाभारत 8.55.35
तत्र ते पार्थिवाः सर्वे शरवृष्टीः समासृजन्क्रोधरक्तेक्षणाः क्रूरा हन्तुकामा वृकोदरम्
tatra te pārthivāḥ sarve śaravṛṣṭīḥ samāsṛjankrodharaktekṣaṇāḥ krūrā hantukāmā vṛkodaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें