महाभारत 8.55.36
स विदार्य महासेनां शरैः संनतपर्वभिःनिश्चक्राम रणाद्भीमो मत्स्यो जालादिवाम्भसि
sa vidārya mahāsenāṃ śaraiḥ saṃnataparvabhiḥniścakrāma raṇādbhīmo matsyo jālādivāmbhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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