महाभारत 8.55.38
पञ्च चाश्वसहस्राणि रथानां शतमेव चहत्वा प्रास्यन्दयद्भीमो नदीं शोणितकर्दमाम्
pañca cāśvasahasrāṇi rathānāṃ śatameva cahatvā prāsyandayadbhīmo nadīṃ śoṇitakardamām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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