महाभारत 8.56.4
कुरूणामपि सर्वेषां कर्णः शत्रुनिषूदनःशर्म वर्म प्रतिष्ठा च जीविताशा च संजय
kurūṇāmapi sarveṣāṃ karṇaḥ śatruniṣūdanaḥśarma varma pratiṣṭhā ca jīvitāśā ca saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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