महाभारत 8.56.8
द्राव्यमाणं बलं दृष्ट्वा भीमसेनेन धीमतायन्तारमब्रवीत्कर्णः पाञ्चालानेव मा वह
drāvyamāṇaṃ balaṃ dṛṣṭvā bhīmasenena dhīmatāyantāramabravītkarṇaḥ pāñcālāneva mā vaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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