महाभारत 8.57.2
शोणितोदां महीं कृत्वा मांसमज्जास्थिवाहिनीम्वासुदेवमिदं वाक्यमब्रवीत्पुरुषर्षभ
śoṇitodāṃ mahīṃ kṛtvā māṃsamajjāsthivāhinīmvāsudevamidaṃ vākyamabravītpuruṣarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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