महाभारत 8.58.10
चतुःशताः शरवर्षैर्हताः पेतुः किरीटिनापर्यस्तानीव शृङ्गाणि ससत्त्वानि महागिरेः
catuḥśatāḥ śaravarṣairhatāḥ petuḥ kirīṭināparyastānīva śṛṅgāṇi sasattvāni mahāgireḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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