महाभारत 8.58.13
व्यस्फूर्जयच्च गाण्डीवं सुमहद्भैरवस्वनम्घोरो वज्रविनिष्पेषः स्तनयित्नोरिवाम्बरे
vyasphūrjayacca gāṇḍīvaṃ sumahadbhairavasvanamghoro vajraviniṣpeṣaḥ stanayitnorivāmbare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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