महाभारत 8.58.15
नानारूपाः प्रहरणाः शरा गाण्डीवचोदिताःअलातोल्काशनिप्रख्यास्तव सैन्यं विनिर्दहन्
nānārūpāḥ praharaṇāḥ śarā gāṇḍīvacoditāḥalātolkāśaniprakhyāstava sainyaṃ vinirdahan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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