महाभारत 8.58.24
ते तमभ्यर्दयन्बाणैरुल्काभिरिव कुञ्जरम्आततेष्वसनाः क्रूरा नृत्यन्त इव भारत
te tamabhyardayanbāṇairulkābhiriva kuñjaramātateṣvasanāḥ krūrā nṛtyanta iva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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