महाभारत 8.58.5
ततो भल्लैः क्षुरप्रैश्च नाराचैर्निर्मलैरपिगात्राणि प्राक्षिणोत्पार्थः शिरांसि च चकर्त ह
tato bhallaiḥ kṣurapraiśca nārācairnirmalairapigātrāṇi prākṣiṇotpārthaḥ śirāṃsi ca cakarta ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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