महाभारत 8.6.40
जहि पार्थान्सपाञ्चालान्राधेय विजयाय नःउद्यन्निव सदा भानुस्तमांस्युग्रैर्गभस्तिभिः
jahi pārthānsapāñcālānrādheya vijayāya naḥudyanniva sadā bhānustamāṃsyugrairgabhastibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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