महाभारत 8.63.17
देवगर्भौ देवसमौ देवतुल्यौ च रूपतःसमेतौ पुरुषव्याघ्रौ प्रेक्ष्य कर्णधनंजयौ
devagarbhau devasamau devatulyau ca rūpataḥsametau puruṣavyāghrau prekṣya karṇadhanaṃjayau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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