महाभारत 8.63.25
तावकानां रणे कर्णो ग्लह आसीद्विशां पतेतथैव पाण्डवेयानां ग्लहः पार्थोऽभवद्युधि
tāvakānāṃ raṇe karṇo glaha āsīdviśāṃ patetathaiva pāṇḍaveyānāṃ glahaḥ pārtho'bhavadyudhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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