महाभारत 8.63.57
इत्युक्तो देवदेवाभ्यां सहस्राक्षोऽब्रवीद्वचःआमन्त्र्य सर्वभूतानि ब्रह्मेशानानुशासनात्
ityukto devadevābhyāṃ sahasrākṣo'bravīdvacaḥāmantrya sarvabhūtāni brahmeśānānuśāsanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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