महाभारत 8.63.79सपताकाध्वजं कर्णं सशल्यरथवाजिनम्सच्छत्रकवचं चैव सशक्तिशरकार्मुकम्sapatākādhvajaṃ karṇaṃ saśalyarathavājinamsacchatrakavacaṃ caiva saśaktiśarakārmukamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें