महाभारत 8.66.10
संधीयमानं भुजगं दृष्ट्वा कर्णेन माधवःआक्रम्य स्यन्दनं पद्भ्यां बलेन बलिनां वरः
saṃdhīyamānaṃ bhujagaṃ dṛṣṭvā karṇena mādhavaḥākramya syandanaṃ padbhyāṃ balena balināṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें