महाभारत 8.66.59
रौद्रमस्त्रं समादाय क्षेप्तुकामः किरीटवान्ततोऽग्रसन्मही चक्रं राधेयस्य महामृधे
raudramastraṃ samādāya kṣeptukāmaḥ kirīṭavāntato'grasanmahī cakraṃ rādheyasya mahāmṛdhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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