महाभारत 8.66.60
ग्रस्तचक्रस्तु राधेयः कोपादश्रूण्यवर्तयत्सोऽब्रवीदर्जुनं चापि मुहूर्तं क्षम पाण्डव
grastacakrastu rādheyaḥ kopādaśrūṇyavartayatso'bravīdarjunaṃ cāpi muhūrtaṃ kṣama pāṇḍava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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