महाभारत 8.67.31
प्रताप्य सेनामामित्रीं दीप्तैः शरगभस्तिभिःबलिनार्जुनकालेन नीतोऽस्तं कर्णभास्करः
pratāpya senāmāmitrīṃ dīptaiḥ śaragabhastibhiḥbalinārjunakālena nīto'staṃ karṇabhāskaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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