महाभारत 8.69.3
वज्रिणा निहतो वृत्रः संयुगे भूरितेजसात्वया तु निहतः कर्णो धनुषा निशितैः शरैः
vajriṇā nihato vṛtraḥ saṃyuge bhūritejasātvayā tu nihataḥ karṇo dhanuṣā niśitaiḥ śaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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