महाभारत 8.69.42
तं प्रत्यगृह्णाद्विदुरो नृपतिं संजयस्तथापर्याश्वासयतश्चैवं तावुभावेव भूमिपम्
taṃ pratyagṛhṇādviduro nṛpatiṃ saṃjayastathāparyāśvāsayataścaivaṃ tāvubhāveva bhūmipam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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