महाभारत 8.7.21
पुच्छे आस्तां महावीरौ भ्रातरौ पार्थिवौ तदाचित्रसेनश्च चित्रश्च महत्या सेनया वृतौ
pucche āstāṃ mahāvīrau bhrātarau pārthivau tadācitrasenaśca citraśca mahatyā senayā vṛtau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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