महाभारत 8.7.3
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
कर्णस्य मतमाज्ञाय पुत्रस्ते भरतर्षभयोगमाज्ञापयामास नान्दीतूर्यपुरःसरम्
karṇasya matamājñāya putraste bharatarṣabhayogamājñāpayāmāsa nāndītūryapuraḥsaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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