महाभारत 8.7.4महत्यपररात्रे तु तव पुत्रस्य मारिषयोगो योगेति सहसा प्रादुरासीन्महास्वनःmahatyapararātre tu tava putrasya māriṣayogo yogeti sahasā prādurāsīnmahāsvanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें