महाभारत 8.8.39
संनिवर्त्यात्मनो नागं क्षेमधूर्तिः प्रयत्नतःविव्याधाभिद्रुतं बाणैर्भीमसेनं सकुञ्जरम्
saṃnivartyātmano nāgaṃ kṣemadhūrtiḥ prayatnataḥvivyādhābhidrutaṃ bāṇairbhīmasenaṃ sakuñjaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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