महाभारत 8.9.35
सा वध्यमाना समरे केकयस्य महाचमूःतमुत्सृज्य रथं शत्रुं प्रदुद्राव दिशो दश
sā vadhyamānā samare kekayasya mahācamūḥtamutsṛjya rathaṃ śatruṃ pradudrāva diśo daśa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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