महाभारत 9.1.11
ततो दुर्योधनो राजा हतबन्धू रणाजिरात्अपसृत्य ह्रदं घोरं विवेश रिपुजाद्भयात्
tato duryodhano rājā hatabandhū raṇājirātapasṛtya hradaṃ ghoraṃ viveśa ripujādbhayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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