महाभारत 9.1.14ततः पूर्वाह्णसमये शिबिरादेत्य संजयःप्रविवेश पुरीं दीनो दुःखशोकसमन्वितःtataḥ pūrvāhṇasamaye śibirādetya saṃjayaḥpraviveśa purīṃ dīno duḥkhaśokasamanvitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें