महाभारत 9.1.29
धृष्टद्युम्नो हतो राजञ्शिखण्डी चापराजितःउत्तमौजा युधामन्युस्तथा राजन्प्रभद्रकाः
dhṛṣṭadyumno hato rājañśikhaṇḍī cāparājitaḥuttamaujā yudhāmanyustathā rājanprabhadrakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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