महाभारत 9.10.47
त्रासनीं रिपुसैन्यानां स्वसैन्यपरिहर्षिणीम्मनुष्यलोके विख्यातां गिरिशृङ्गविदारिणीम्
trāsanīṃ ripusainyānāṃ svasainyapariharṣiṇīmmanuṣyaloke vikhyātāṃ giriśṛṅgavidāriṇīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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