महाभारत 9.11.1
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
पतितं प्रेक्ष्य यन्तारं शल्यः सर्वायसीं गदाम्आदाय तरसा राजंस्तस्थौ गिरिरिवाचलः
patitaṃ prekṣya yantāraṃ śalyaḥ sarvāyasīṃ gadāmādāya tarasā rājaṃstasthau giririvācalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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