महाभारत 9.11.39
तस्मिन्प्रवृत्ते संग्रामे राजन्वीरवरक्षयेअनिलेनेरितं घोरमुत्तस्थौ पार्थिवं रजः
tasminpravṛtte saṃgrāme rājanvīravarakṣayeanileneritaṃ ghoramuttasthau pārthivaṃ rajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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