महाभारत 9.11.49
तं वार्य पाण्डवं बाणैर्हन्तुकामो महायशाःविव्याध समरे क्रुद्धो बहुभिः कङ्कपत्रिभिः
taṃ vārya pāṇḍavaṃ bāṇairhantukāmo mahāyaśāḥvivyādha samare kruddho bahubhiḥ kaṅkapatribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें